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सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
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वैशम्पाय़न उवाच
एतत्सुनाभं वृष्णीनामृषभेण त्वय़ा धृतम् |  ३८   क
चक्रमप्रतिचक्रेण भुवि नान्योऽभिपद्यते ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति