आदि पर्व  अध्याय ९२

स्त्र्यु उवाच

तेषां जनय़िता नान्यस्त्वदृते भुवि विद्यते |  ५१   क
मद्विधा मानुषी धात्री न चैवास्तीह काचन ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति