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शान्ति पर्व
अध्याय १८७
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भीष्म उवाच
तत्र यत्प्रीतिसंय़ुक्तं काय़े मनसि वा भवेत् |  ३०   क
वर्तते सात्त्विको भाव इत्यवेक्षेत तत्तदा ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति