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कर्ण पर्व
अध्याय ६७
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सञ्जय़ उवाच
पाण्डवेय़स्त्वसम्भ्रान्तो वाय़व्यास्त्रेण वीर्यवान् |  ११   क
अपोवाह तदाभ्राणि राधेय़स्य प्रपश्यतः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति