आश्रमवासिक पर्व  अध्याय १२

धृतराष्ट्र उवाच

विकल्पा वहवो राजन्नापदां पाण्डुनन्दन |  ११   क
सामादिभिरुपन्यस्य शमय़ेत्तान्नृपः सदा ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति