वन पर्व  अध्याय ५९

वृहदश्व उवाच

इति व्रुवन्नलो राजा दमय़न्तीं पुनः पुनः |  ३   क
सान्त्वय़ामास कल्याणीं वाससोऽर्धेन संवृताम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति