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विराट पर्व
अध्याय १२
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वैशम्पाय़न उवाच
ववन्ध कक्ष्यां कौन्तेय़स्ततस्तं हर्षय़ञ्जनम् |  १९   क
ततस्तं वृत्रसङ्काशं भीमो मल्लं समाह्वय़त् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति