शान्ति पर्व  अध्याय ३६

व्यास उवाच

सुरापानं सकृत्पीत्वा योऽग्निवर्णां पिवेद्द्विजः |  १३   क
स पावय़त्यथात्मानमिह लोके परत्र च ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति