विराट पर्व  अध्याय १२

वैशम्पाय़न उवाच

स ह्यक्षहृदय़ज्ञस्तान्क्रीडय़ामास पाण्डवः |  ४   क
अक्षवत्यां यथाकामं सूत्रवद्धानिव द्विजान् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति