द्रोण पर्व  अध्याय १२

सञ्जय़ उवाच

तत्तु सर्वं यथावृत्तं धर्मराजेन भारत |  २   क
आप्तैराशु परिज्ञातं भारद्वाजचिकीर्षितम् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति