menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय १२
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
ततः शल्यो महाराज निर्विद्धस्तैर्महारथैः |  १२   क
सुस्राव रुधिरं गात्रैर्गैरिकं पर्वतो यथा ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति