menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अथाभिपत्य वेगेन समुद्भ्राम्य च राक्षसम् |  ३१   क
वलेनाक्षिप्य हैडिम्वश्चकर्तास्य शिरो महत् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति