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शल्य पर्व
अध्याय १२
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सञ्जय़ उवाच
ते वार्यमाणाः समरे मद्रराज्ञा महारथाः |  २७   क
न शेकुः प्रमुखे स्थातुं तस्य शत्रुनिषूदनाः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति