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शल्य पर्व
अध्याय १२
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सञ्जय़ उवाच
ते शरा मद्रराजेन प्रेषिता रणमूर्धनि |  ३९   क
सम्पतन्तः स्म दृश्यन्ते शलभानां व्रजा इव ||  ३९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति