menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ३३
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
जनार्दनं सात्यकिं च प्रेम्णा स परिषस्वजे |  १३   क
मूर्ध्नि चैतावुपाघ्राय़ कुशलं पर्यपृच्छत ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति