आदि पर्व  अध्याय २०

सूत उवाच

तं समुद्रमतिक्रम्य कद्रूर्विनतय़ा सह |  १   क
न्यपतत्तुरगाभ्याशे नचिरादिव शीघ्रगा ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति