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शान्ति पर्व
अध्याय १३५
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भीष्म उवाच
ततः प्रक्षाल्यमानेषु मत्स्येषु विमले जले |  १५   क
त्यक्त्वा रज्जुं विमुक्तोऽभूच्छीघ्रं सम्प्रतिपत्तिमान् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति