शान्ति पर्व  अध्याय १२०

भीष्म उवाच

कालप्राप्तमुपादद्यान्नार्थं राजा प्रसूचय़ेत् |  ३१   क
अहन्यहनि सन्दुह्यान्महीं गामिव वुद्धिमान् ||  ३१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति