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आदि पर्व
अध्याय ११४
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वैशम्पाय़न उवाच
दैवे पुरुषकारे च लोकोऽय़ं हि प्रतिष्ठितः |  १६   क
तत्र दैवं तु विधिना कालय़ुक्तेन लभ्यते ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति