अनुशासन पर्व  अध्याय १२०

कीट उवाच

सुखात्सुखतरं प्राप्तो भगवंस्त्वत्कृते ह्यहम् |  ११   क
धर्ममूलां श्रिय़ं प्राप्य पाप्मा नष्ट इहाद्य मे ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति