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वन पर्व
अध्याय १२०
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सात्यकिरु उवाच
यथा प्रविश्यान्तरमन्तकस्य; काले मनुष्यो न विनिष्क्रमेत |  १४   क
तथा प्रविश्यान्तरमस्य सङ्ख्ये; को नाम जीवन्पुनराव्रजेत ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति