द्रोण पर्व  अध्याय १२०

सञ्जय़ उवाच

नूनमात्मविनाशाय़ पाण्डवेन किरीटिना |  १७   क
प्रतिज्ञेय़ं कृता कर्ण जय़द्रथवधं प्रति ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति