द्रोण पर्व  अध्याय १२०

सञ्जय़ उवाच

शोणिताक्तान्हय़ारोहान्गृहीतप्रासतोमरान् |  ३४   क
क्षुरैश्चिच्छेद वीभत्सुर्द्विधैकैकं त्रिधैव च ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति