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द्रोण पर्व
अध्याय १२०
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सञ्जय़ उवाच
तत्र पार्थस्य शूरस्य वाह्वोर्वलमदृश्यत |  ५०   क
इषूणामक्षय़त्वं च धनुषो गाण्डिवस्य च ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति