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द्रोण पर्व
अध्याय १२०
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सञ्जय़ उवाच
तं कर्णः संय़ुगे राजन्प्रत्यवारय़दाशुगैः |  ५८   क
मिषतो भीमसेनस्य सात्वतस्य च भारत ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति