शान्ति पर्व  अध्याय २९३

करालजनक उवाच

एवमेवाभिसम्वद्धौ नित्यं प्रकृतिपूरुषौ |  १९   क
पश्यामि भगवंस्तस्मान्मोक्षधर्मो न विद्यते ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति