अनुशासन पर्व  अध्याय १३५

भीष्म उवाच

उत्तरो गोपतिर्गोप्ता ज्ञानगम्यः पुरातनः |  ६६   क
शरीरभूतभृद्भोक्ता कपीन्द्रो भूरिदक्षिणः ||  ६६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति