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शान्ति पर्व
अध्याय १२१
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भीष्म उवाच
दण्डो हि भगवान्विष्णुर्यज्ञो नाराय़णः प्रभुः |  २२   क
शश्वद्रूपं महद्विभ्रन्महापुरुष उच्यते ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति