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शान्ति पर्व
अध्याय १२१
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भीष्म उवाच
दण्डेन रक्ष्यमाणा हि राजन्नहरहः प्रजाः |  ३४   क
राजानं वर्धय़न्तीह तस्माद्दण्डः पराय़णम् ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति