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शान्ति पर्व
अध्याय ८७
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भीष्म उवाच
तत्र कोशं वलं मित्रं व्यवहारं च वर्धय़ेत् |  ११   क
पुरे जनपदे चैव सर्वदोषान्निवर्तय़ेत् ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति