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शान्ति पर्व
अध्याय १२१
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भीष्म उवाच
सप्तप्रकृति चाष्टाङ्गं शरीरमिह यद्विदुः |  ४६   क
राज्यस्य दण्ड एवाङ्गं दण्डः प्रभव एव च ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति