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उद्योग पर्व
अध्याय १४१
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सञ्जय़ उवाच
योऽय़ं पृथिव्याः कार्त्स्न्येन विनाशः समुपस्थितः |  २   क
निमित्तं तत्र शकुनिरहं दुःशासनस्तथा |  २   ख
दुर्योधनश्च नृपतिर्धृतराष्ट्रसुतोऽभवत् ||  २   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति