वन पर्व  अध्याय ७२

केशिन्यु उवाच

अथ जानाति वार्ष्णेय़ः क्व नु राजा नलो गतः |  १३   क
कथञ्चित्त्वय़ि वैतेन कथितं स्यात्तु वाहुक ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति