आदि पर्व  अध्याय १२२

द्रुपद उवाच

अकृतेय़ं तव प्रज्ञा व्रह्मन्नातिसमञ्जसी |  २   क
यन्मां व्रवीषि प्रसभं सखा तेऽहमिति द्विज ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति