आदि पर्व  अध्याय १२२

वैशम्पाय़न उवाच

स समासाद्य मां तत्र प्रिय़कारी प्रिय़ंवदः |  २८   क
अव्रवीदिति मां भीष्म वचनं प्रीतिवर्धनम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति