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शान्ति पर्व
अध्याय १२४
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धृतराष्ट्र उवाच
ततो वृहस्पतिस्तस्मै ज्ञानं नैःश्रेय़सं परम् |  २१   क
कथय़ामास भगवान्देवेन्द्राय़ कुरूद्वह ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति