शान्ति पर्व  अध्याय १२२

वसुहोम उवाच

स गर्भं शिरसा देवो वर्षपूगानधारय़त् |  १६   क
पूर्णे वर्षसहस्रे तु स गर्भः क्षुवतोऽपतत् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति