शान्ति पर्व  अध्याय १२२

वसुहोम उवाच

ततः स भगवान्ध्यात्वा चिरं शूलजटाधरः |  २४   क
आत्मानमात्मना दण्डमसृजद्देवसत्तमः ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति