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शान्ति पर्व
अध्याय १२२
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भीष्म उवाच
इतीदं वसुहोमस्य शृणुय़ाद्यो मतं नरः |  ५४   क
श्रुत्वा च सम्यग्वर्तेत स कामानाप्नुय़ान्नृपः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति