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वन पर्व
अध्याय १२२
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लोमश उवाच
तपोनित्यस्य वृद्धस्य रोषणस्य विशेषतः |  १५   क
केनापकृतमद्येह भार्गवस्य महात्मनः |  १५   ख
ज्ञातं वा यदि वाज्ञातं तदृतं व्रूत माचिरम् ||  १५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति