वन पर्व  अध्याय १२२

लोमश उवाच

तामेव प्रतिगृह्याहं राजन्दुहितरं तव |  २३   क
क्षमिष्यामि महीपाल सत्यमेतद्व्रवीमि ते ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति