शान्ति पर्व  अध्याय २८६

पराशर उवाच

न जाय़ते तु नृपते कञ्चित्कालमय़ं पुनः |  १८   क
परिभ्रमति भूतात्मा द्यामिवाम्वुधरो महान् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति