menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आदि पर्व
अध्याय १४५
chevron_left
chevron_right
व्राह्मण उवाच
एकात्मापि हि धर्मार्थौ कामं च न निषेवते |  २२   क
एतैश्च विप्रय़ोगोऽपि दुःखं परमकं मतम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति