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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
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सञ्जय़ उवाच
ये तु विद्यामुपादाय़ गुरुभ्यः पुरुषाधमाः |  २२   क
घ्नन्ति तानेव दुर्वृत्तास्ते वै निरय़गामिनः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति