आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७७

वैशम्पाय़न उवाच

छित्त्वा तु तानाशुगमान्कङ्कपत्राञ्शिलाशितान् |  १५   क
एकैकमेष दशभिर्विभेद समरे शरैः ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति