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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
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सञ्जय़ उवाच
द्रोणपुत्रश्च शैनेय़ं सर्वतः पर्यवारय़न् |  ६४   क
ततः पर्याकुलं सर्वं न प्राज्ञाय़त किञ्चन ||  ६४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति