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द्रोण पर्व
अध्याय १२२
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सञ्जय़ उवाच
तं समारुह्य शैनेय़स्तव सैन्यमुपाद्रवत् |  ८२   क
दारुकोऽपि यथाकामं प्रय़यौ केशवान्तिकम् ||  ८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति