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आदि पर्व
अध्याय १२३
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्रोपकरणं गृह्य नरः कश्चिद्यदृच्छय़ा |  १६   क
राजन्ननुजगामैकः श्वानमादाय़ पाण्डवान् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति