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शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
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श्रीभगवानु उवाच
व्राह्मे रात्रिक्षय़े प्राप्ते तस्य ह्यमिततेजसः |  १५   क
प्रसादात्प्रादुरभवत्पद्मं पद्मनिभेक्षण |  १५   ख
तत्र व्रह्मा समभवत्स तस्यैव प्रसादजः ||  १५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति