आश्वमेधिक पर्व  अध्याय २०

वासुदेव उवाच

यत्र व्रह्मादय़ो युक्तास्तदक्षरमुपासते |  ११   क
विद्वांसः सुव्रता यत्र शान्तात्मानो जितेन्द्रिय़ाः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति